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नवजात शिशà¥à¤“ं में पीलिया
नवजात शिशà¥à¤“ं में पीलिया की परिà¤à¤¾à¤·à¤¾: पितà¥à¤¤ के रोगन (बिलिरà¥à¤¬à¤¿à¤¨) दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ नवजात शिशॠकी चमड़ी तथा आंख के सफेद हिसà¥à¤¸à¥‡ (सà¥à¤•à¥à¤²à¥‡à¤°à¥€) पर पीले रंग के धबà¥à¤¬à¥‡à¥¤ नवजात शिशà¥à¤“ं में à¤à¤• हद तक पीलिया सामानà¥à¤¯ बात है। यह लाल रकà¥à¤¤ कोशिकाओं (जो रकà¥à¤¤ में बिलिरà¥à¤¬à¤¿à¤¨ छोड़ती हैं) के टूटने à¤à¤µà¤‚ नवजात के यकृत की अपरिपकà¥à¤µà¤¤à¤¾ (जो बिलिरà¥à¤¬à¤¿à¤¨ का पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¥€ तरीके से अपचय कर मूतà¥à¤° के माधà¥à¤¯à¤® से शरीर से बाहर फेंकने के लिठतैयार करने में असमरà¥à¤¥ होता है) के कारण होता है। नवजात शिशà¥à¤“ं में सामानà¥à¤¯ पीलिया जनà¥à¤® के दूसरे तथा पाà¤à¤šà¤µà¥‡à¤‚ दिन में उà¤à¤°à¤¤à¤¾ है तथा समय के साथ समापà¥à¤¤ हो जाता है। नवजात शिशà¥à¤“ं में पीलिया निओनेटल हाइपरबिलिरà¥à¤¬à¤¿à¤¨à¥‡à¤®à¤¿à¤† या नवजात का फिज़िओलॉजिक पीलिया à¤à¥€ कहा जाता है।
नवजात शिशॠमें पीलिया या निओनेटल जॉंनà¥à¤¡à¤¿à¤¸ सामानà¥à¤¯à¤¤à¤ƒ हानि रहित होता है तथा आमतौर पर जनà¥à¤® के दूसरे दिन के आसपास देखा जाता है। यह सामानà¥à¤¯ पà¥à¤°à¤¸à¥‚ति में 8 दिनों तक जारी रह सकता है या समय पूरà¥à¤µ जनà¥à¤® में लगà¤à¤— 14 दिनों तक।
यह इसलिठहोता है कि नवजात शिशॠकी यकृत बिलिरà¥à¤¬à¤¿à¤¨ नामक रोगन को बाहर निकालने के लिठआवशà¥à¤¯à¤• गति से कारà¥à¤¯ नहीं कर पाता। बिलिरà¥à¤¬à¤¿à¤¨ à¤à¤• पीला रोगन है, जो लाल रकà¥à¤¤ कोशिकाओं के टूटने से बनता है तथा गà¥à¤°à¥à¤¦à¥‹à¤‚ à¤à¤µà¤‚ यकृत दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ साफ किया जाता है। चूंकि यकृत तà¥à¤²à¤¨à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤• रूप से अपरिपकà¥à¤µ होता है, वह इस रोगन से छà¥à¤Ÿà¤•ारा पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ करने में असमरà¥à¤¥ होता है, जो इकटà¥à¤ ा हो जाता है। फलसà¥à¤µà¤°à¥‚प यह तà¥à¤µà¤šà¤¾ को पीला कर देता है। इसलिठयदि आप जनà¥à¤® के दो दिनों बाद पीली तà¥à¤µà¤šà¤¾ देखें तो घबराà¤à¤‚ नहीं।
लकà¥à¤·à¤£
पीली तà¥à¤µà¤šà¤¾
पीला शà¥à¤µà¥‡à¤¤à¤ªà¤Ÿà¤² à¤à¤µà¤‚ नाखून
शिशॠसामानà¥à¤¯ से अधिक समय तक सोता है।
उपचार
यदि पीलिया हलà¥à¤•ा हो तो यह 10 दिनों में अपने आप ठीक हो जाता है। लेकिन, इसकी गमà¥à¤à¥€à¤°à¤¤à¤¾ को कम करने के लिठउसका उपचार करना आवशà¥à¤¯à¤• है |
अधिक बार बचà¥à¤šà¥‡ को सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ कराà¤à¤‚ |
सूरà¥à¤¯ की सीधी रोशनी में रखें। यदि हो सके तो बचà¥à¤šà¥‡ का पलंग या à¤à¥‚ला खिड़की पर पतला परà¥à¤¦à¤¾ डालकर उसके पास रखें |
उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ बिलि पà¥à¤°à¤•ाश (à¤à¤• पà¥à¤°à¤•ाश उपचार यà¥à¤•à¥à¤¤à¤¿) में रखें यानि बिलिरà¥à¤¬à¤¿à¤¨ को विà¤à¤¾à¤œà¤¿à¤¤ करने के लिठउनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ उचà¥à¤š सà¥à¤¤à¤° के रंगीन पà¥à¤°à¤•ाश में रखें। सामानà¥à¤¯à¤¤à¤ƒ इस उदà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¥à¤¯ के लिठनीले पà¥à¤°à¤•ाश का उपयोग किया जाता है। बिलिरà¥à¤¬à¤¿à¤¨ को विà¤à¤¾à¤œà¤¿à¤¤ करने में हरा पà¥à¤°à¤•ाश अधिक पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¥€ होता है। लेकिन सामानà¥à¤¯à¤¤à¤ƒ इसका उपयोग नहीं किया जाता कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि शिशॠबीमार दिखने लगता है |
गमà¥à¤à¥€à¤° अवसà¥à¤¥à¤¾à¤“ं में रकà¥à¤¤ दिया जाता है |
हरे रोगन से मà¥à¤•à¥à¤¤à¤¿ के लिठयकृत को उतà¥à¤¤à¥‡à¤œà¤¿à¤¤ करने हेतॠविशिषà¥à¤Ÿ दवाओं का उपयोग करें।
धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ दें: यदि पीलिया 2 हफà¥à¤¤à¥‹à¤‚ बाद à¤à¥€ जारी रहता है; तो नवजात शिशॠका मेटाबॉलिक सà¥à¤•à¥à¤°à¥€à¤¨ गेलेकà¥à¤Ÿà¥‹à¤¸à¥‡à¤®à¤¿à¤¯à¤¾ तथा कंजेनिटल हाइपोथाइरॉइडिज़à¥à¤® के लिठजांच की जानी चाहिà¤à¥¤ नवजात शिशॠके वज़न के रà¥à¤à¤¾à¤¨ के साथ पारिवारिक इतिहास à¤à¥€ देखा जाना चाहिà¤à¥¤ मल के रंग का आकलन à¤à¥€ किया जाना चाहिà¤à¥¤
कà¥à¤› रोचक तथà¥à¤¯
à¤à¤• सरà¥à¤µà¥‡à¤•à¥à¤·à¤£ के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤• पीलिया नवजात लड़कियों की तà¥à¤²à¤¨à¤¾ में नवजात लड़कों को अधिक होता है। लेकिन यह बिलिरà¥à¤¬à¤¿à¤¨ के उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ की दर से समà¥à¤¬à¤¦à¥à¤§ नहीं है, जो कि नवजात लड़कियों के समान ही होता है |
हाल ही में फà¥à¤°à¤¾à¤‚सीसी शोधकरà¥à¤¤à¤¾à¤“ं ने कहा है कि सूरà¥à¤¯ की तेज़ रोशनी में रखने से तà¥à¤µà¤šà¤¾ पर तिल हो जाà¤à¤‚गे। चिकितà¥à¤¸à¤•ीय शबà¥à¤¦à¤¾à¤µà¤²à¥€ में इन तिलों को मेलेनोसाइटिक नेवि कहा जाता है। अत: शोधकरà¥à¤¤à¤¾ पालकों को सलाह देते हैं कि तेज़ रोशनी के उपचार के समय परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ दें |
कà¥à¤› वरà¥à¤· पहले जॉन हॉपकिंस विशà¥à¤µà¤µà¤¿à¤¦à¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ ने सिदà¥à¤§ किया था कि बिलिरà¥à¤¬à¤¿à¤¨ रोगन, जो तà¥à¤µà¤šà¤¾ को पीला कर देता है, à¤à¤• शकà¥à¤¤à¤¿à¤¶à¤¾à¤²à¥€ ऑकà¥à¤¸à¤¿à¤¡à¥‡à¤‚ट है। यह बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ की कोशिकाओं को नà¥à¤•सान से बचाता है। इसलिठपीलिया कोशिकाओं के नà¥à¤•सान के विरà¥à¤¦à¥à¤§ à¤à¤• रोध की तरह कारà¥à¤¯ कर सकता है। लेकिन पीलिया के लिठउचित देखà¤à¤¾à¤² की जानी चाहिठ|
जनà¥à¤® के बाद कà¥à¤› दिनों में बचà¥à¤šà¥‡ को पानी पिलाना नवजात में पीलिया की तीवà¥à¤°à¤¤à¤¾ को बढ़ा देता है। इसलिठपानी देने के बजाय बचà¥à¤šà¥‡ को अधिक सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ कराà¤à¤‚।
कम वजन
सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ और पà¥à¤·à¥à¤Ÿ माताओं के गरà¥à¤ से पैदा होनेवाले शिशॠका सामानà¥à¤¯ वजन 3.5 किलोगà¥à¤°à¤¾à¤® होता है। लेकिन à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ शिशà¥à¤“ं का औसत वजन 2.7 से 2.9 किलोगà¥à¤°à¤¾à¤® तक होता है। शिशॠके जनà¥à¤® के à¤à¤• घंटे के à¤à¥€à¤¤à¤° उसका वजन लेना बहà¥à¤¤ जरूरी है। इससे शिशॠके विकास और उसके जीवित रहने की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ की जानकारी मिलती है। अंतरराषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤¯ सà¥à¤¤à¤° पर शिशॠके कम वजन को 2.5 किलोगà¥à¤°à¤¾à¤® से कम तय किया गया है। शिशॠका जनà¥à¤® गरà¥à¤ के पूरे समय या समय से पहले हो सकता है। कम वजन के शिशà¥à¤“ं के दो पà¥à¤°à¤•ार होते हैं-
समय से पहले जनà¥à¤®à¤¾ शिशॠ- वैसे शिशà¥, जो समय से पहले, जैसे गरà¥à¤à¤§à¤¾à¤°à¤£ के 37वें सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ में ही पैदा हो जाते हैं। समà¥à¤šà¤¿à¤¤ देखà¤à¤¾à¤² से जनà¥à¤® से दो-तीन साल के à¤à¥€à¤¤à¤° उनका आंतरिक विकास, जैसे वजन, लंबाई या अनà¥à¤¯ विकास, सामानà¥à¤¯ हो सकता है।
असामानà¥à¤¯ बचà¥à¤šà¥‡ (à¤à¤¸à¤à¤«à¤¡à¥€) - à¤à¤¸à¥‡ शिशॠसमय पर या समय से पहले पैदा हो सकते हैं। उनका वजन सामानà¥à¤¯ से बहà¥à¤¤ कम होता है। यह à¤à¥à¤°à¥‚णावसà¥à¤¥à¤¾ में हà¥à¤ˆ गड़बड़ी के कारण होता है।
जनà¥à¤® के समय कम वजन : समसà¥à¤¯à¤¾ की रोकथाम के उपाय
जनà¥à¤®à¤•ालिक कम वजन के शिशà¥à¤“ं की रोकथाम के लिठनिमà¥à¤¨à¤²à¤¿à¤–ित उपाय किये गये हैं :
अचà¥à¤›à¥€ पà¥à¤°à¤¸à¤µà¥‹à¤¤à¥à¤¤à¤° देखà¤à¤¾à¤²
सà¤à¥€ गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ महिलाओं का निबंधन और खतरे में पड़ी महिलाओं की पहचान
खान-पान में सà¥à¤§à¤¾à¤°, संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ à¤à¥‹à¤œà¤¨ लेने के लिठपà¥à¤°à¥‹à¤¤à¥à¤¸à¤¾à¤¹à¤¿à¤¤ करना, पूरक पोषण की वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾, लोहे की फोलिक à¤à¤¸à¤¿à¤¡ गोलियों का वितरण
मधà¥à¤®à¥‡à¤¹, उचà¥à¤š रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª जैसी गैर-संकà¥à¤°à¤¾à¤®à¤• बीमारियों की पहचान और चिकितà¥à¤¸à¤¾
सà¥à¤µ-औषधि को हतोतà¥à¤¸à¤¾à¤¹à¤¿à¤¤ करना
छोटे परिवार के लिठपरिवार नियोजन के उपाय अपनाने को पà¥à¤°à¥‹à¤¤à¥à¤¸à¤¾à¤¹à¤¨, शिशà¥à¤“ं के जनà¥à¤® में समà¥à¤šà¤¿à¤¤ अंतर और गरà¥à¤à¤§à¤¾à¤°à¤£ के लिठसमय की पहचान को पà¥à¤°à¥‹à¤¤à¥à¤¸à¤¾à¤¹à¤¨à¥¤
कà¥à¤ªà¥‹à¤·à¤£
कà¥à¤ªà¥‹à¤·à¤£, कम या असंतà¥à¤²à¤¿à¤¤ à¤à¥‹à¤œà¤¨ के कारण होता है। पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ ऊरà¥à¤œà¤¾ कà¥à¤ªà¥‹à¤·à¤£ सबसे गंà¤à¥€à¤° कà¥à¤ªà¥‹à¤·à¤£ समसà¥à¤¯à¤¾ है।
पांच-छह महीने तक मांगने पर केवल सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨
पांच-छह महीने तक सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ के बाद पोषण से à¤à¤°à¤ªà¥‚र खादà¥à¤¯ सामगà¥à¤°à¥€, जैसे गाय का दूध, फल, गीला चावल, अनà¥à¤¯ अनाज और दालों से पूरक
पूरà¥à¤£ à¤à¥‹à¤œà¤¨, जिसमें अनाज, दालें, सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¤¾à¤‚, दूध और दूध के उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦ की वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾
बालिका शिशॠके लिठसमà¥à¤šà¤¿à¤¤ और संपूरà¥à¤£ आहार सà¥à¤¨à¤¿à¤¶à¥à¤šà¤¿à¤¤ करना
गरà¥à¤à¤§à¤¾à¤°à¤£ से पहले समà¥à¤šà¤¿à¤¤ और पोषणयà¥à¤•à¥à¤¤ आहार
पोषण में किसी पà¥à¤°à¤•ार की कमी की पहचान और उसका उचित उपचार
संकà¥à¤°à¤¾à¤®à¤• बीमारियां
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में कई पà¥à¤°à¤•ार की संकà¥à¤°à¤¾à¤®à¤• बीमारियां आम हैं और इसके कारण उनकी मृतà¥à¤¯à¥ दर काफी बढ़ जाती है। इनमें डायरिया, सांस लेने संबंधी गंà¤à¥€à¤° गड़बड़ी (à¤à¤†à¤°à¤†à¤‡), खसरा, पेटà¥à¤°à¥‚सिस, डिपà¥à¤¥à¥‡à¤°à¤¿à¤¯à¤¾, पोलियो, टेटनस और यकà¥à¤·à¥à¤®à¤¾à¥¤
दà¥à¤°à¥à¤˜à¤Ÿà¤¨à¤¾à¤à¤‚ और विषपान
घरों, सड़कों, सà¥à¤•ूलों आदि में वà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ खतरों के कारण बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में दà¥à¤°à¥à¤˜à¤Ÿà¤¨à¤¾à¤à¤‚ और विषपान की घटनाà¤à¤‚ काफी आम हैं। इनके कारण बचà¥à¤šà¥‡ जल जाते हैं, डूब जाते हैं, जहर खा लेते हैं, गिर जाते हैं, बिजली का à¤à¤Ÿà¤•ा खाते हैं या सड़क दà¥à¤°à¥à¤˜à¤Ÿà¤¨à¤¾à¤“ं के शिकार होते हैं।
बाल सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯
बाल सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ का अरà¥à¤¥ गरà¥à¤à¤§à¤¾à¤°à¤£ से जनà¥à¤® और उसके बाद पांच साल की उमà¥à¤° तक देखà¤à¤¾à¤² है। पांच साल की उमà¥à¤° के बाद बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ पर सà¥à¤•ूल सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ पà¥à¤°à¥‹à¤—à¥à¤°à¤¾à¤®à¤° टीम नजर रखती है। मातृ शिशॠसà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ के सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ कारà¥à¤¯à¤•रà¥à¤¤à¤¾ सà¥à¤•ूल सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ टीम के सदसà¥à¤¯ हो à¤à¥€ सकते हैं और नहीं à¤à¥€ हो सकते हैं।
बचà¥à¤šà¥‡ का सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ वासà¥à¤¤à¤µ में बालिका शिशॠके जनà¥à¤® के साथ शà¥à¤°à¥‚ होता है, जो बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ की à¤à¤¾à¤µà¥€ मां है। इसमें à¤à¥à¤°à¥‚णावसà¥à¤¥à¤¾ में ही बालिका शिशॠके सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ सौतेला रवैया और पà¥à¤°à¤¸à¤µ पूरà¥à¤µ बरती जानेवाली सावधानियों के दौरान नजर आता है। सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ देखà¤à¤¾à¤² में जनà¥à¤® से 28 दिन तक की अवधि शामिल की गयी है। शिशà¥à¤“ं की देखà¤à¤¾à¤² à¤à¤• से 12 महीने तक की जाती है। अबोध बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में à¤à¤• से दो साल तक के बचà¥à¤šà¥‡ आते हैं, जबकि सà¥à¤•ूल पूरà¥à¤µ में दो साल से अधिक के बचà¥à¤šà¥‡ शामिल किये गये हैं। बाल सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ देखà¤à¤¾à¤² सेवाओं के उदà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¥à¤¯ निमà¥à¤¨à¤²à¤¿à¤–ित हैं-
सà¤à¥€ बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को समà¥à¤šà¤¿à¤¤ देखà¤à¤¾à¤² और पोषण मिले |
उनके विकास और वृदà¥à¤§à¤¿ पर सतत निगरानी रखी जाये और किसी पà¥à¤°à¤•ार की कमी आने पर ततà¥à¤•ाल उसका इलाज किया जाये |
बीमारी का ततà¥à¤•ाल पता लगाया जाये और हालत बिगड़ने से बचाने के लिठउसकी ततà¥à¤•ाल चिकितà¥à¤¸à¤¾ की जाये |
पà¥à¤°à¤¶à¤¿à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ उनकी देखà¤à¤¾à¤² करें |
मां और परिवार के अनà¥à¤¯ लोगों को उनके बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ की देखà¤à¤¾à¤² करने तथा उसे सà¥à¤§à¤¾à¤°à¤¨à¥‡ के बारे में शिकà¥à¤·à¤¿à¤¤ और पà¥à¤°à¤¶à¤¿à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ किया जाये |
वृदà¥à¤§à¤¿ और विकास की निगरानी
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ की वृदà¥à¤§à¤¿ और विकास पर सतत निगरानी रखना जरूरी है। यह बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ और पोषण की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ का संकेत करता है। इससे सामानà¥à¤¯ वृदà¥à¤§à¤¿ व विकास में किसी पà¥à¤°à¤•ार की रà¥à¤•ावट का ततà¥à¤•ाल पता चलता है और उस पर परिवार या सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ केंदà¥à¤° सà¥à¤¤à¤° पर समय रहते धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ दिया जा सकता है।
बचà¥à¤šà¥‡ की वृदà¥à¤§à¤¿
बचà¥à¤šà¥‡ की वृदà¥à¤§à¤¿ का मतलब उसके शारीरिक विकास से है, जिसे शरीर के वजन, लंबाई, सिर, बांह और छाती के वà¥à¤¯à¤¾à¤¸ से नापा जाता है। इन नापों की संदरà¥à¤ नाप से तà¥à¤²à¤¨à¤¾ की जाती है और पता लगाया जा सकता है कि बचà¥à¤šà¥‡ की वृदà¥à¤§à¤¿ सामानà¥à¤¯ है या नहीं (इसमें ऊपर या नीचे दो का अंतर सà¥à¤µà¥€à¤•ारà¥à¤¯ है)।
सामानà¥à¤¯à¤¤à¥Œà¤° पर सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ और सà¥à¤ªà¥‹à¤·à¤¿à¤¤ शिशॠअपने जीवन के पहले साल के दौरान सबसे तेज गति से बढ़ता है।
वजन
लगà¤à¤— सà¤à¥€ शिशà¥à¤“ं का वजन जनà¥à¤® के तीन-चार दिन के दौरान कम होता है। फिर वे सात से 10 दिन के दौरान वजन दोबारा हासिल करने लगते हैं। पहले तीन महीने के दौरान उनका वजन 25 से 30 गà¥à¤°à¤¾à¤® पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¦à¤¿à¤¨ की दर से बढ़ता है और बाद में इसमें कमी आ जाती है। सामानà¥à¤¯à¤¤à¥Œà¤° पर शिशॠपांच महीने में अपना वजन दोगà¥à¤¨à¤¾ और à¤à¤• साल में तिगà¥à¤¨à¤¾ कर लेते हैं। जनà¥à¤® के समय कम वजन वाले शिशॠइसके अपवाद हैं।
जनà¥à¤® के समय कम वजन वाले शिशॠपहले ही अपना वजन दोगà¥à¤¨à¤¾ और à¤à¤• साल में चार गà¥à¤¨à¤¾ कर लेते हैं। à¤à¤• साल के बाद यह गति उतनी तेज नहीं रहती है। अनेक शिशà¥à¤“ं का वजन चकà¥à¤° पहले पांच से छह महीने में काफी अचà¥à¤›à¤¾ रहता है, जब उनका वजन जनà¥à¤® के समय के मà¥à¤•ाबले दोगà¥à¤¨à¤¾ हो जाता है। लेकिन इसके बाद वजन वृदà¥à¤§à¤¿ का चकà¥à¤° नीचे गिरने लगता है या अनियमित हो जाता है। यह इसलिठहोता है, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ ही शिशॠके लिठपरà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ नहीं होता। सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ की कमी को पहले बताये गये खादà¥à¤¯ सामगà¥à¤°à¥€ से पूरा किया जाना चाहिà¤à¥¤
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ का वजन उनकी लंबाई पर à¤à¥€ निरà¥à¤à¤° करता है। यह जांचना बहà¥à¤¤ आवशà¥à¤¯à¤• है कि बचà¥à¤šà¥‡ का वजन सामानà¥à¤¯ है या नहीं। बचà¥à¤šà¥‡ का वजन उसकी लंबाई के अनà¥à¤°à¥‚प कम या अधिक हो सकता है। लंबाई के कारण वजन कम होना कà¥à¤ªà¥‹à¤·à¤£ का संकेत करता है।
लंबाई
बचà¥à¤šà¥‡ की लंबाई उसकी वृदà¥à¤§à¤¿ का à¤à¤• और पैमाना है। नवजात शिशॠकी लंबाई 50 सेंटीमीटर होती है। पहले साल इसमें 25 सेंटीमीटर की वृदà¥à¤§à¤¿ होती है। दूसरे साल 12 सेंटीमीटर और तीसरे, चौथे तथा पांचवें साल इसमें कà¥à¤°à¤®à¤¶à¤ƒ नौ, सात और छह सेंटीमीटर की वृदà¥à¤§à¤¿ होती है।
सिर और छाती का वà¥à¤¯à¤¾à¤¸
जनà¥à¤® के समय सिर का वà¥à¤¯à¤¾à¤¸ करीब 34 सेंटीमीटर होता है। छह से नौ महीने के बाद छाती का वà¥à¤¯à¤¾à¤¸ बढ़ जाता है और यह सिर के वà¥à¤¯à¤¾à¤¸ से अधिक हो जाता है। यदि बचà¥à¤šà¤¾ कà¥à¤ªà¥‹à¤·à¤¿à¤¤ है, तो छाती का वà¥à¤¯à¤¾à¤¸ तीन-चार साल तक सिर के वà¥à¤¯à¤¾à¤¸ को पार नहीं करता है।
मधà¥à¤¯ बांह का वà¥à¤¯à¤¾à¤¸
बांह के ऊपरी हिसà¥à¤¸à¥‡ के बीच को उस समय नापा जाता है, जब वह शरीर के दोनों तरफ à¤à¥‚ल रहा होता है। फीते को मांसपेशियों को दबाये बिना उसके चारों तरफ लपेटा जाता है और फिर उसका नाप लिया जाता है। जनà¥à¤® से लेकर à¤à¤• साल तक इसमें तेजी से वृदà¥à¤§à¤¿ होती है। यह वृदà¥à¤§à¤¿ 11 से 12 सेंटीमीटर तक की होती है। अचà¥à¤›à¥€ तरह से पोषित बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ की बांह का वà¥à¤¯à¤¾à¤¸ पांच साल तक 16 से 17 सेंटीमीटर पर सà¥à¤¥à¤¿à¤° रहता है। इस अवधि में जनà¥à¤® के समय की चरà¥à¤¬à¥€ के सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पर मांसपेशियां बनती हैं। सामानà¥à¤¯ से 80 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ कम, यानी करीब 12.8 सेंटीमीटर का नाप à¤à¤¯à¤‚कर कà¥à¤ªà¥‹à¤·à¤£ का संकेत करता है।
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